NU की शामें

NU की शामें

NU की शामें…
ढलते हुए सूरज की छटा
बादलों के चेहरों पर लाली बिखेर देती है
ऐसी सजावट के पहलू में बैठे , फूल भी शर्मा जाते है
ठंडी हवा की लहर में, चिड़िया भी खूब मचलती हैं
चांद के स्वागत की थाल , आसमान तारो से सजाता है
क्षितिज के पल्लू में , चांद भी कम नहीं इतराता है
आंखों में इतनी चमक, वक़्त भी रुक् के निहारता है
NU की शामों के शब में, वो भी डूब जाता है

Shashwat Mishra

B.Tech (CSE)

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