जेहनसीब

जेहनसीब

काश देखा तूने कभी खुद को बोलते हुए.

एक नहीं कई दफ़ा, ख़ुद से तुझे प्यार हुआ होता।

 

मालूम नहीं तुझे हसी कितनी प्यारी है तेरी।

बेपरवाह हसते तुझे देख, खुद से प्यार हुआ होता।

 

कितनी नादान सी लगती है तू , आंखे बंदकर सोते हुए

काश देख पाती खुद को कभी मेरी निग़ाहों से।

 

झाँक के पढ़ लेता हू, तेरी आखों में छिपे हर ग़म को.

मुस्कराते लबो के पीछे,छिपे हर दर्द को।

 

हसती रहे तू मुस्कराती रहे, हर ग़म तुझसे रूठा रहे

मन्नतो में दुआओं में, हर चीज़ अज़ीज़ तुझे मिलती रहे।

 

#जेहनसीब #मुक्तक

 

Samir Vats

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