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NU Blog Editor

जेहनसीब

जेहनसीब

काश देखा तूने कभी खुद को बोलते हुए. एक नहीं कई दफ़ा, ख़ुद से तुझे प्यार हुआ होता।   मालूम नहीं तुझे हसी कितनी प्यारी है तेरी। बेपरवाह हसते तुझे देख, खुद से प्यार हुआ होता।   कितनी नादान सी…
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NU की शामें

NU की शामें

NU की शामें… ढलते हुए सूरज की छटा बादलों के चेहरों पर लाली बिखेर देती है ऐसी सजावट के पहलू में बैठे , फूल भी शर्मा जाते है ठंडी हवा की लहर में, चिड़िया भी खूब मचलती हैं चांद के…
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